Laylat-ul Qadr, The Night of Power

Blessing of Ramadan
Laylat-ul Qadr (The Night of Power) is narreted in the Quran as it is better than a thousand months (Surah Al-Qadr 97: ayah 3). This is the special night Among the nights of Ramadan. Good deeds performed on that single night are equal to those performed over a thousand months. In this night (27th of Ramadan) The Holy Qur’an was sent down from the Preserved Tablet (LOH-E-MEHFOOZ) to the earth. Prophet Muhammad Rasul-Allah (peace be upon him) Said that search Shab-e-Qadr in the odd numbered nights in the last ten days of Ramadan (Bukhari). 21st, 23rd, 25th, 27th or 29th night of ramadan could be Shab-e-Qadr.

In a hadith related by Abu Hurairah Radiallahu Anhu, Rasulullah said “He who spends the night in prayer in the Laylat-ul Qadr, as a sign of His faith, and seeking rewards from Allah, his previous sins will be forgiven.” (Bukhari and Muslim)

Hazrat Aisha Radiallah Anha stated that as much Prophet Muhammad Rasul-Allah (peace be upon him) tried Ibadat in the last Ashra (ten days) of Ramadan, did not try in any of the Ashra. (Muslim)

Hazrat Aisha Radiallah Anha stated that I asked Prophet Muhammad Rasul-Allah (peace be upon him), “If I find Lailatul Qadar then what should I do? Prophet Muhammad Rasul-Allah (peace be upon him) said, recite this Dua.”ALLAH HUMMA INNAKA A’FUVUN TOHIB BUL AFVA FA’AFU ANNI” (Tirmidhi)

In this Night We Should perform Sunnah prayers or Tahajjud, Recite Al-Qur’an, Salawat (Darood Sharif & Salaam) and make Dua’as.

Special Dua of Laylat-ul Qadr is “ALLAH HUMMA INNAKA A’FUVUN TOHIB BUL AFVA FA’AFU ANNI”.

Itikaf:
Itikaf was a practice of the Prophet Muhammad Rasul-Allah (peace be upon him) to spend the last ten days and nights of Ramadan in the masjid for Itikaf.
Stay in the masjid all Itikaf time, perform various forms of zikr (the remembrance of Allah), do extra Salat, recite and study of the Quran. don’t go outside the masjid except in case of emergencies and sleep in the masjid.
Itikaf of a shorter period of time, like one night, a day or a couple of days is encouraged as well.

Share This

Tasbih of Tarawih during the month of Ramadan

Blessing of Ramadan
The Taraweeh Prayer is Sunnah of the Prophet Muhammad (peace be upon him) during the month of Ramadan between Salat Al-Isha and Salat Al-Witr.
All Sunni Muslims Should Perform twenty raka’at of Salat Al-Taraweeh in congregation.
Recite the following Tasbih three times after every four raka’at of Salat Al-Taraweeh.


Recite the following Tasbih three times after First four raka’at of Salat Al-Taraweeh.
Ash-hadu Alla-ilaha illallahu Wahdahu Lasharikalahu wa Ash-hadu anna Muhammadan Abduhu wa Rasooluh


Recite the following Tasbih three times after Second four raka’at of Salat Al-Taraweeh.
Allahumma Salle-ala Saiyedna Muhammadinw wa ala Aale Saiyedna Muhammadinw wa As-habehi wa Baarik wa Sallim


Recite the following Tasbih three times after Third four raka’at of Salat Al-Taraweeh.
Subhan-allahi walhamdulillahi wala ilaha illallahu wallahu Akbar, wala hawwala wala kuwwata illa billa hil Aliyyil Azeem


Recite the following Tasbih three times after Fourth four raka’at of Salat Al-Taraweeh.
Subhan-allahi wabi hamdihi Subhan-allahil Aliyyil Azeem wabi hamdihi Astagfirullah Astagfirullah Rabbi Min Kulli Zanbinw khati atinw Atubu ilayh


Recite the following Tasbih three times after Fifth four raka’at of Salat Al-Taraweeh.
Astagfirullah Astagfirullah Hillazi La ilaha illa huwal haiyyul-Kaiyyum Gaffaruz-zonub Sattarul Oyub Allamul-goyub Kashshaakul-kolub ya mokallebal kolub wal Absaari wa Atubu ilayh

Share This

रमज़ानुल मुबारक की मखसूद दुआए

Blessing of Ramadan

शहरीकी निय्यत
नवयतो अन असुमो गदनलिल्लाहे तआला मीन फर्जे रमजान हाज़ा
इफ्तारकी दुआ
अल्लाहुम्मा लका सुमतो व बेका आमन्तो व अलयका तवक्कलतो व अला रिज़्क़ेका अफ्तरतो फतकब्बल मिन्नी

अय अल्लाह मुझे लैलतुल कद्र नसीब फरमा।
अय अल्लाह मुझे कामिले ईमान नसीब फरमा और पूरी हिदायत अता फरमा।
अय अल्लाह कलमा ए तैय्यब जबान पर जारी फरमा।
अय अल्लाह हमें पुरे रमजान की नेअमते​ ​बरकते अनवारात से मालामाल फरमा।
अय अल्लाह हमारे दिलोको इख्लास के साथ दीन ए इस्लाम की तरफ फेर दे।
अय अल्लाह अपनि खास रेहमत नाजिल फरमा और अपने कहर व गज़ब से बचा।
​अय अल्लाह झूठ, ग़ीबत, किना, तकब्बुर, बुराई और जगडे से हमारी हिफाज़त फरमा।
​अय अल्लाह हमारे सगीरा व कबीरा गुनाहोंको माफ़ फरमा दे।
​अय अल्लाह तंग दस्ती, खौफ, गभराहट और क़र्ज़ के बोज़ को दूर फरमा।
अय अल्लाह एक लम्हे के लिए भी हमें दुनिया के हवाले न फरमा।
अय अल्लाह हमको दज़्ज़ाल के फ़ितने, शैतान और नफ़स के शर से, मौत की सख्ती से, कबर के अज़ाब से, क़यामत की गरमी से और जहन्नम की आग से महफूज़ फरमा।
​अय अल्लाह हश्रकी​ रुस्वाईसे हमारे वालीदैन और पूरी उम्मते मुहम्मदियाकी हफ़ाज़त फरमा।
​अय अल्लाह पुलसीरत पर से बिजलीकी तरह गुजार दे।
​अय अल्लाह बिना हिसाब व किताब हमें जन्नतुल फ़िरदौस में जगह नशीब फरमा।
​​अय अल्लाह नामए आमाल हमारे दाहिने हाथमें नशीब फरमा।
अय अल्लाह अपने अर्श के साये में जगह नशीब फरमा।
अय अल्लाह हज्जे बैतुल्लाह मकबूल व मबरुर नशीब फरमा।
अय अल्लाह मुनकर नकिरैनके सवालात हम पर आसान फरमा।
अय अल्लाह हलाल रोज़ी अता फरामा।
अय अल्लाह क़यामत के रोज़ अपना दीदार अता फरामा।
अय अल्लाह हमें तेरे बन्दोंका मोहताज न बना।
अय अल्लाह औरतोंकी पूरी पूरी पाबन्दी अता फरामा।
​अय अल्लाह छोटी बड़ी हर बीमारी से ​उम्मते मुहम्मदिया की हिफाज़त फरमा।
​अय अल्लाह तक़वा और परहेज़गारी नशीब फरमा।
​अय अल्लाह हमारी कौमको सिराते मुस्तकीम पर कायम रहनेवाला बना और अपनी रजा पर राज़ी रखनेकी तौफीक अता फरमा।
​​अय अल्लाह​ हुज़ूर ए अक़दस सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमके प्यारे तरीके हमको सिखादे और उनकी सुन्नत पर चलनेकी तौफीक अता फरमा।
​​अय अल्लाह​ क़यामत के दिन हुज़ूर ए अकरम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमकी सफाअत नशीब फरमा। 
​​अय अल्लाह​ क़यामत के दिन हुज़ूर पुरनूर सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमके मुबारक हाथोंसे जामे कौसर पीना नशीब फरमा।
​​अय अल्लाह​ हुज़ूर सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने भलाई के लिए जो दुआ मांगी उसे हमारे हक्कमें नशीब फरमा और जिन-जिन बुराइयोंसे पनाह चाहि उससे हमारी हिफाज़त फरमा।
​​अय अल्लाह​ हमारे दिलोमे अपनी और हुज़ूर सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमकी मोहोब्बत अता फरमा और उन्ही के सदकेमें हमारी इन तमाम दुआओं को कुबूल फरमा।

सहेरी में पढ़नेकी दुआ
या वसीअल फ़ज़ली, या वसीअल मग फिरती, इग फिरली।
पहले ​रोज़े से दसवें रोज़े तक पढ़नेकी दुआ
अल्ला हम्मर-हमना या अरहमर्राहेमिन
ग्यारवें रिज़े से बीसवें रोज़े तक पढ़नेकी दुआ
अल्लाह हुम्मग फिरलना ज़ोनुबना या रब्बल आलमीन
इक्कीसवें रोज़े से आखरी रोज़े तक पढ़नेकी दुआ
अल्ला हुम्मा किना अज़ाबन्नार व अद खिल्नल जन्नता माअल अबरार या अज़ीज़ु, या गफ्फार
शबे क़द्र की शबमें पढ़नेकी दुआ(शबे क़द्र की शबें २१, २३, २५, २७, २९)
अल्ला हुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ़व-फअफु अन्ना या गफूरु या गफूरु या गफूरु
​रमजान शरीफमें कसरतसे चलते फिरते पढ़नेकी दुआ​
ला इलाहा इल्ललाहु अल्लाहुम्मा नस्तग फिरुका व नस्अलुकल जन्नता-व-नऊज़ुबिका मिनन्नार
Share This

रमज़ान महीने की तराविह की तस्बीह

Ramadan Mubarak
रमज़ान के मुबारक महीने में नमाज़ ए इशा के बाद वितरों से पेहले दो(२)-दो(२) रकअत की नीयत से बीस(२०) रकाअत तराविह की सुन्नत नमाज़ पढ़ी जातीहै ये नमाज़ जमाअत के साथ पढ़ना अफज़ल है। तरावीहमें हर चार(४) रकअत के बाद तीन(३)-तीन(३) मर्तबा निचे दी गए तस्बीह पढ़े ।


पहली चार(४) रकअत के बाद ये तस्बीह तीन बार पढ़े (४ रकअत) 
अश्हदो अल्लाइलाहा इल्लल्लाहो वहदहु लाशरीकलहु व अश्हदो अन्ना मुहम्मदन अब्दोहु व रसूलुह


​दूसरी चार(४) रकअत के बाद ये तस्बीह तीन बार पढ़े (८ रकअत)
अल्लाहुम्मा सल्लेअला सैयदना मुहम्मदिंव व अला आले सैयदना मुहम्मदिंव व असहाबेहि व बारीक़ व सल्लीम

तीसरी चार(४) रकअत के बाद ये तस्बीह तीन बार पढ़े (१२ रकअत)
सुब्हानल्लाहे वल्हम्दोलिल्लाहि वला इलाहा इल्लल्लाहो वल्लाहो अकबर वला हव्वला वला कुव्वता इल्ला बिल्ला हिल अलिय्यिल अजीम

चौथी चार(४) रकअत के बाद ये तस्बीह तीन बार पढ़े (१६ रकअत)
सुब्हानअल्लाहे वबे हम्देही सुब्हानअल्लाहिल अलिय्यिल अजीम वबे हम्देही अस्तग़फेरुल्लाह अस्तग़फेरुल्लाह रब्बी मीन कुल्ले ज़म्बिंव्व खती अतिव्वं अतुबो एलैह

पांचवी चार(४) रकअत के बाद ये तस्बीह तीन बार पढ़े (२० रकअत)
अस्तग़फेरुल्लाह अस्तग़फेरुल्लाह हिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला होवल हैयुल-कैयुम गफ्फरूज़-जोनूब सत्तारुल ओयूब अल्लामुल गोयूब कश्शाकुल कोलुब या मोकल्लेबल कोलुब वल अबसरे व अतुबो एलैह
Share This
Subscribe

Get the latest posts delivered to your mailbox: