दुआए आशूरा – १० मुहर्रम

हजरत जैनुल आबेदीन रदिअल्लाहु अन्हु से रिवायत है की जो मुसलमान आशूरा के दिन यानि १० मुहर्रम को सूरज निकलने से लेकर सूरज ढलने तक सच्चे दिलसे दुआए आशूरा पढ़ेगा वह पुरे साल मौत के सदमेँसे इन्शाअल्लाह महफूज़ रहेगा और अगर मौत आनिहि है तो अजीब इत्तेफाक है उस साल दुआए आशूरा पढ़नेकी तौफीक न होगी|

दुआए आशूरा

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
या काबील तौबती आदम यौम आशूरा
​या फारीझा कर्बी जिन्नुनी ​यौम आशूरा
​या झामिअ शम्ली याकूब यौम आशूरा
​या सामिअ दअवती मुसा व हारुन यौम आशूरा
या मुगीस इब्राहिम मिनन्नारी यौम आशूरा
या राफेअ इद्रीस इलस्समाइ ​यौम आशूरा
​या मुजीब ​दअवती सालिहीन फिन्नाकती यौम आशूरा
या नासिर सैयदना मुहम्मदिन सल्लल्लाहु अलय्ही वसल्लम यौम आशूरा
या रेहमानद-दुनिया वल आखिरति वरहीमहुमा सल्लिअला सैयदीना मुहम्मदींव – वअला आली सैयदीना मुहम्मदींव वसल्लि अला झमीइल अमबीयाइ वल मुरसलीन वाकदी हजतिना फीद-दुनिया वल आखिरति व अतिल उमरना फीताअतीक व महब्बतीक वरिदाक वअहयिना हयातन तय्यीबतंव वतवफफना अलल इमानि वल इस्लामी बिरहमतिक या अरहमर्राहीमीन। अल्लाहुम्म बीइज़्ज़िल हसनी वअखीही व उम्मीही व अबीही वजद्दीही वबनीही फर्रिज अन्ना मानहनु फ़ीहि।

​फिर सात बार ये दुआ पढ़े
​​सुब्हानल्लाहि मिल्अल्मीजानी व मुनतहल्इल्मी वल्मब्लगर्रीदा वज़ीनतल अर्शी लामल्जाअ वला मन्जाअ मिनल्लाहि इल्ला इलैह। सुब्हानल्लाहि अदद श्शफइ वलवतरी व अदद कलिमा तिल्लाहीताम्माति कुल्लीहा नस्अलुकस्सलामत बिरहमतिक या अर्हमर्राहिमिन। वहुव हस्बुना व निअमल वकील। निअमल मौला व निअमन्नसीर। वाल हौल वला कुव्वत इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम। व सल्लल्लाहु तआला अला सैयदीना मुहम्मदींव व अला आलीही व सहबीही व अलल मुअमीनिन वलमुअमिनाती वलमुस्लिमिन वलमुस्लिमाती अदद ज़र्रातिलवुजूदि व अदद मअलुमातिल्लाही रब्बिल आलमीन।

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