हजरत जैनुल आबेदीन रदिअल्लाहु अन्हु से रिवायत है की जो मुसलमान आशूरा के दिन यानि १० मुहर्रम को सूरज निकलने से लेकर सूरज ढलने तक सच्चे दिलसे दुआए आशूरा पढ़ेगा वह पुरे साल मौत के सदमेँसे इन्शाअल्लाह महफूज़ रहेगा और अगर मौत आनिहि है तो अजीब इत्तेफाक है उस साल दुआए आशूरा पढ़नेकी तौफीक न होगी|
दुआए आशूरा
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
या काबील तौबती आदम यौम आशूरा
या मुगीस इब्राहिम मिनन्नारी यौम आशूरा
या राफेअ इद्रीस इलस्समाइ
या नासिर सैयदना मुहम्मदिन सल्लल्लाहु अलय्ही वसल्लम यौम आशूरा
या रेहमानद-दुनिया वल आखिरति वरहीमहुमा सल्लिअला सैयदीना मुहम्मदींव – वअला आली सैयदीना मुहम्मदींव वसल्लि अला झमीइल अमबीयाइ वल मुरसलीन वाकदी हजतिना फीद-दुनिया वल आखिरति व अतिल उमरना फीताअतीक व महब्बतीक वरिदाक वअहयिना हयातन तय्यीबतंव वतवफफना अलल इमानि वल इस्लामी बिरहमतिक या अरहमर्राहीमीन। अल्लाहुम्म बीइज़्ज़िल हसनी वअखीही व उम्मीही व अबीही वजद्दीही वबनीही फर्रिज अन्ना मानहनु फ़ीहि।