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पैगंबर आदम अलैहिस्सलाम की कहानी हिंदी में | Prophet Adam Story in Hindi

पैगंबर आदम

पैगंबर आदम अलैहिस्सलाम को सब से पहले दुनिया में भेजा गया। और उनको अबुलबशर यानि सारे इन्सानों के पिता कहा जाता है। हम सब इन्ही की औलाद हैं इसी लिये इंसान को “आदमी” कहा जाता है।

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पैगंबर आदम (अ.स.) से पहले क्या था

जब कुछ भी नही था तब सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह पाक की जात ए मुबारक थी। फिर अल्लाह त’आला ने पानी को बनाया और पानी के उपर अपना अर्श बनाया। फिर उसने क़लम (पेन) को बनाया, फिर अल्लाह ने लोहे महफूज़ बनाया जहाँ हर चीज़ क़लम से लिखी हुई है। उसके बाद अल्लाह ने ज़मीन और आसमान को बनाया। उसके बाद फरिश्तो को बनाया और जिन्न को बनाया, उसके बाद 6 दीनो मैं पूरी दुनिया बनाए।

अल्लाह त’आला ने फरिश्तो को नूर से, जिन्नो को आग से, और इंसान को मिट्टी से पैदा किया।

अल्लाह त’आला ने जिन्नो को आदम (अ.स.) 2000 साल पहले दुनिया मैं भेजाथा लेकिन वहाँ फ़साद किया, तो अल्लाह त’आला ने फरिश्तो को भेजा जिन्होने जिन्नो को ज़मीन से दूर कर दिया। उन जिन्नो मैं अक आज़ाज़ील भी था जो अल्लाह त’आला का इबादत गुज़ार बंदा था, तो फरिश्ते उसे अपने साथ ले आए जो बाद मैं अपने तकब्बुर (घमंड) और नफ़ारमनी की वजह से इब्लीस कहलाया यानी सख़्त मायूस क्योंकी वो हमेशा हमेशा के लिए अल्लाह त’आला की रहमत से मायूस है।

हज़रत आदम की पैदाइश

फिर अल्लाह ने हज़रत आदम की पैदाइश का इरादा फ़रमाया और फरिश्तो से कहा की मैं ज़मीन मैं खलीफा बनाने वाला हूँ तो फरिश्तो ने अल्लाह से कहा की आप क्यों इंसानको बनाना चाहते हैं जब की हम तो मौजूद है जो दिन रात आपकी हम्द और तसबीह करते हैं, ये इंसान भी जिन्नो तरह ज़मीन मैं जाकर फ़साद करेंगे और एक दूसरे का खून बहाएँगे।

अल्लाह त’आला ने कहा “जो मैं जनता हूँ वो तुम नही जानते”, यानी अल्लाह त’आला उन्हे क्यों बना रहे हैं ये अल्लाह को पता था।

बेशक मैं बनाने वाला हूँ ज़मीन में अपना नायब। उन्होंने कहा तू उसे नायब बनायेगा जो वहाँ फ़साद करें और ख़ून बहाएं और हम तेरी हम्द के साथ तेरी तस्बीह बयान करते हैं और तेरी पाकी बयान करते हैं। फ़रमाया बेशक मैं जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।

(सूरते बक़र आयत 29 ,30 )

अल्लाह त’आला ने ज़मीन से मिट्टी मँगवाई तो फरिश्ते पूरी दुनियासे थोड़ी थोड़ी मिट्टी ले आए। मिट्टी थोड़ी काली, थोड़ी लाल, थोड़ी ब्राउन थी इसलिए इंसान की शकल हर तरह की हैं।

फिर अल्लाह त’आला ने अपने हाथोसे पैगंबर आदम (अ.स.) को बनाया और 40 दीनो के लिए छोढ़ दिया किसी रिवायत मैं 40 साल आता है। फ़रिश्ते इसे देखने के लिए आते थे। इब्लीस भी अपने पैर से इस पुतले को ठोकर मारता और कहता मैं तुझ पर ग़ालिब आगया तो तुझे हलाक कर दूंगा और अगर तू मेरा हाकिम बनगया तो मैं तेरी नाफ़रमानी करुँगा।

शैतान का थूक और कुत्ता

एक बार इब्लीस मरदूद ने बुग्ज़ व कीने में आकर हज़रत आदम (अ.स.) के पुतले मुबारक पर थूक दिया। यह थूक हज़रत आदम (अ.स.) की नाफ़ मुबारक पर पडी।

अल्लाह त’आला ने जिब्रईंल (अ.स) को हुक्म दिया कि इस जगह से उतनी मिट्टी निकाल कर उस मिटटी का कुत्ता बना दो! तो उस शैतानी थूक से मिली मिटटी का कुत्ता बना दिया गया!

यह कुत्ता आदमी से मानूस है! बिकॉज़ चूंकि मिट्टी हजरत आदम (अ.स.) की है! और गंदा इसलिये है कि थूक शैतान’की है! रात को जागता इसलिये है कि हाथ इसे जिब्रईल (अ.स.) के लगे हैं।
(रूहुल ब्यान जिल्द 1, सफा 68)

जिस्म में रूह का दाखिल होना

जब वह मिट्टी मज़बूत हो गई और सूखकर ठीकरे की तरह आवाज़ करने लगी और जब आदम (अ.स.) का पुतला पक्का हो गया तो अल्लाह तआला ने इसमें रूह फूंकने का इरादा फ़रमाया। अल्लाह त’आला ने हुकुम दिया की जैसे ही मैं आदम (अ.स.) मैं रूह फूंकू तुम सब सजदा करना, ये सजदा ए ताज़ीम था इस सजदे का हुकुम अल्लाह ता’ला ने इसलिए दिया की सब को पता चल जाए की आदम अलैही सलाम की हैसियत फरिश्तो और जिन्नो से ज़्यादा है।

जब रूह फूँकी तो रूह सरमैं दाखिल हुई और आदम (अ.स.) को छींक आए तो फरिश्तोने कहा की आप कहिए अल्हम्दुलिल्लाह यानी “तमाम तारीफ और शूकर अल्लाह ही के लिए है”, इस पर अल्लाह त’आला ने फरमाया रहमका रब्बुक “तुझ पर तेरा रब रहम फरमाये”।

अब रूह आँखों में दाखिल हुई तो आदम (अ.स.) जन्नत के फल देखने लगे, जब रूह पेट मैं गई तो उन्हे भूख महसूस हुई, जब रूह पैरों में गई तो उन्होने चलने की कोशिश की, उसपर अल्लाह त’आला ने क़ूर’आन मैं फरमाया “इंसान जल्दबाज़ है”।

इब्लीस का घमण्ड

जैसे ही अल्लाह त’आला ने रूह फूँकी तो सारे फरिश्तोने सजदा किया सिवाए इब्लीस के, उसने अल्लाह की नफ़रमानी की और सजदा नही किया।

इब्लीस एक नेक और बुज़ुर्ग जिन्न था उसने कभी अल्लाह त’आला की नफ़रमानी नही कीथी वो बहोत इबादत गुज़ार था इसीलिए उसका मर्तबा फरिश्तो मैं बुलंद था। इसी बात का उसे बहोत गुरूर हो गया था। और इसी गुरूर मैं अँधा होकर उसने अल्लाह के हुकुम को भी मानने से इनकार कर दिया।

अल्लाह त’आला ने उससे पूछा ऐ इब्लीस तुझे किस चीज़ ने सजदा करने से रोका, कहने लगा मैं उससे बेहतर हूँ तूने आदम को मिट्टी से पैदा किया और मुझे आग से।

अल्लाह त’आला ने कहा, निकल जा यहाँ से तुझे हक़ नही की जन्नत मैं रह कर तकबबूर करे।
इब्लीस कहने लगा ऐ अल्लाह मुझे क़यामत तक की मोहलत दे की मैं ज़िंदा रहूं। तो अल्लाह त’आला ने उसे मोहलत दे दी।

जब मोहलत मिल गयी तो अपनी ग़लती मानने की बजाए अल्लाह त’आला से कहने लगा की मैं क़सम ख़ाता हूँ मैं आदम की औलाद को गुमराह करूँगा, मैं तेरे सीरात-ए-मुस्तक़ीम पर बैठ जाउंगा फिर उनके आगेसे, पीछेसे, दाएंसे, बाएंसे, आउँगा और उन्हे बहकाउँगा, आप इनकी अक्सरीयत को यानी ज़्यादातर को शूकर गुज़ार नही पाएँगे।

मैं इंसानो के गुनाहों को उनके लिए खूबसूरत बनादूँगा, सिवाए तेरे मुख़लिस बंदो के, वो मेरे बहकावे मैं नही आएँगे।

इस पर अल्लाह त’आला ने उससे कहा तू निकल जा यहाँ से आदम की औलाद मैंसे जो तेरा कहा मानेंगे और तेरे साथ चलेंगे, मैं तुझे और उनको सब को जहन्नम से भर दूँगा, जो गुमराह होंगे तेरी पेरवी करेंगे यानी तेरे कदमों पर चलेंगे उनके वादे की जगह जहन्नम होगी।
लेकिन मेरे मुख़लिस बंदो पर तेरा ज़ोर नही चलेगा।

अल्लाह त’आला के इल्म और हिकमत का भी यही तक़ाज़ा था कि औलादे आदम की आज़माइश की जाये। लिहाज़ा उसे लम्बी उम्र अता की और साथ में वो सामान भी अता किया गया जो नस्ले आदम को गुमराह करने के लिए चाहिए थे।

पैगंबर आदम (अ.स.) को इल्म अता किया गया

फिर अल्लाह तआला ने आदम (अ.स.) को इल्म अता किया और तमाम चीज़ों के नाम सिखाये।

क़ुरआन पाक में सूरह अलबक़राह, आयत-31 में है कि “और अल्लाह तआला ने आदम (अ.स.) को तमाम नाम सिखाये”

अल्लाह त’आला ने आदम (अ.स.) को हर चीज़ का नाम सिखाया। तमाम छोटी और बड़ी चीज़ों के नाम ज़ाती और सिफ़ाती दोनों तरह के नाम सिखाये और तमाम कामों के नाम सिखाये।

फिर अल्लाह त’आला ने उनकी पीठ पर हाथ फेरा तो क़यामत तक जीतने भी इंसान पैदा होने वाले हैं सब की रुहै निकल आई अल्लाह ने सब से कहा की “क्या मैं तुम्हारा रब नही?” सब ने कहा की “आप हमारे रब है” सबने सिर्फ़ अक अल्लाह की इबादत का वादा किया इसे वादा-ए-अलस्त कहा जाता है. अभी आलम-ए-अरवाह मैं सबकी रुहीन मौजूद है जो क़यामत तक पैदा होने वाले हैं.

आदम (अ.स.) को पैदा कर के उनसे कहा की जाकर फरिश्तो को सलाम करो उन्होने फरिश्तो से अस-सलामु अलायकुम ٱلسَّلَامُ عَلَيْكُمْ कहा, यानी “सलामती हो आप सब पर” इसके बदले मैं फरिश्तो ने कहा वालेकुम अस-सलाम وَعَلَيْكُمُ ٱلسَّلَامُ – वा रहमतुल्लाही यानी आप पर भी सलामती हो और अल्लाह की रहमत हो, इस पर अल्लाह त’आला ने आदम (अ.स.) से कहा ये तुम्हारी औलाद को एक दूसरे के लिए तोहफा और हदिया है.

अब अल्लाह ने फरिश्तो के सामने दुनिया की कुछ चीज़े पेश की और उनके नाम पूछे फरिश्ते नही जानते थे उन्होने कहा ऐ अल्लाह हमै इल्म नही हमै तो सिर्फ़ उतना ही पता है जितना इल्म आपने हमै दियाहै, फिर उन्ही चीज़ों के नाम आदम (अ.स.) से पूछे तो उन्होने सब के नाम बता दिए.

इस पर अल्लाह त’आला ने फरमाया क्या मैने नही कहा था की मुझे ज़मीन और आसमान की हर चीज़ का इल्म है, जो तुम ज़ाहिर करतेहो और जो तुम छुपाते हो वो सब मैं जानता हूँ.

पैगंबर आदम (अ.स.) को जन्नत मै भेजा गया

अब आदम (अ.स.) को जन्नत का लिबास पहनाया गया और जन्नत मैं रहने को कहा गया. वो जन्नत मैं रहने लगे, लेकिन वो खुद को अकेला महसूस कर रहे थे, अक दिन वो सो रहे थे तो अल्लाह त’आला ने उनकी बाईं पसली से हव्वा (अ.स.) को पैदा किया जो की बहोत ज़्यादा खूबसूरत थी, जब वो सो कर उठे तो उन्होने हव्वा को देखा और पूछा तुम कोन हो उन्होने कहा की अल्लाह ने मुझे आपके लिए पैदा किया है ताकि आप मुझसे सुकून हासिल कर सकें.

पैगंबर आदम (अ.स.) और हव्वा (अ.स.)

वो दोनो खुशी से जन्नत मैं रहने लगे. अल्लाह त’आला ने कहा जहाँ जाना है जाओ जो खाना है खाओ, बस अक दरख़्त (पेड़) का फल खाने के लिए माना किया की अगर खा लोगे तो जालिमो मै से हो जाओगे। उन्होंने अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ उस दरख़्त के पास जाने से ख़ुद को रोके रखा फिर इनके दिल में शैतान ने वसवसा डाला और आख़िर कार दोनों ने वो फल खा लिया जिस से अल्लाह तआला ने उन्हें मना फ़रमाया था।

अभी फल खाना ही शुरू ही किया था कि जन्नती लिबास उतर गया और वह दोनों, पत्तों से अपना सतर ढकने लगे और शर्मिन्दा होकर इधर उधर भागने लगे। अल्लाह त’आला ने फ़रमाया, ऐ आदम! क्या मुझ से भागते हो, उन्हों ने कहा “नहीं, ऐ मेरे रब! बल्कि तुझ से हया करता हूँ।” अल्लाह त’आला ने कहा कि “ऐ आदम! क्या मैंने तुमसे उस दरख़्त के पास जाने से मना नहीं किया था? क्या मैने तुम्हें ख़बरदार नहीं किया था कि शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है?” हज़रत आदम (अ.स.) फ़ौरन अपनी ग़लती का अहसास करते हुए सजदे में गिर गए और नदामत से अर्ज़ करने लगे-

ऐ परवरदिगार हम ने अपनी जानों पर ज़ुल्म किया और अगर आप ने अपने फ़ज़्ल व करम से हमे माफ़ न फ़रमाया और हम पर रहम न फ़रमाया तो हम ख़सारा(नुक़सान) उठाने वाले हो जायेंगे।

(सूरह अल-ऐराफ़,आयत -23)

हज़रत आदम (अ.स.) और हाव्वा को ज़मीन पर उतारा गया

अल्लाह तआला जो सब के दिलों के हाल जानता है वह हज़रत आदम (अ.स.) के दिल की कैफ़ियत को अच्छी तरह जानता था। लेकिन अल्लाह को दुनिया को आबाद करना था और नस्ले इन्सानी को बढ़ाना था इसलिए अल्लाह त’आला ने हज़रत आदम (अ.स.) और हव्वा (अ.स.) को हुक्म दिया कि तुम ज़मीन पर उतर जाओ और वहीं पर रहो और यह बात हमेशा याद रखो कि- “शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है।

कहा जाता है की आदम (अ.स.) को हिंद मैं और हाव्वा (अ.स.) को जेद्‍दाह मैं उतारा गया. वो अपनी ग़लती पर बहोत शर्मिंदा थे उन्हो ने तौबा की तो अल्लाह ने उन्हे कुछ कालेमात सिखाए जिसको उन्होने जब पढ़ा तो अल्लाह ने उन्हे माफ़ किया. और अराफ़ात के मैदान मैं वो मिले फिर दुनिया शुरू हुई.

कहानी अगले पोस्ट में जारी रहेगी
यहाँ पढ़ें पैगंबर आदम अलैहिस्सलाम – भाग 2

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References – संदर्भ
islamijankari.com/history/adam-1/
paigham786.blogspot.com/2015/11/complete-story-of-hazrat-adam.html

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