पैगंबर आदम अलैहिस्सलाम – भाग 2

Story-of-Prophet-Adam-2

कहानी पिछले पोस्ट से जारी है – यहाँ पढ़ें पैगंबर आदम अलैहिस्सलाम की कहानी – भाग 1

अब तक हमने जाना के पैगंबर आदम (अ.स.) से पहले क्या था, उनकी की पैदाइश कैसे हुई, उन्हे जन्नत मे भेजा गया और इब्लिस ने उन्हे बहकाया फिर उन्हे ज़मीन पर उतारा गया। अब हम जानेंगे, हज़रत आदम (अ.स.) को ज़मीन पर उतारे जाने के बाद के वाक़ियात।

ख़ाना-ए-काबा की तरफ़ जाने का हुक्म

हज़रत आदम (अ.स.) हिंद मैं एक पहाड़ की चोटी की तरफ़ उतारा गया। फिर वो पहाड़ से नीचे ज़मीन पर आए और ज़मीन की तरफ़ देखा तो दूर तक फैली हुई ज़मीन के अलावा कुछ नज़र न आया तो वो कहने लगे “ऐ मेरे रब! क्या मेरे सिवा आपकी ज़मीन को आबाद करने वाला कोई नहीं?” तो अल्लाह तआला ने फरमाया “अनक़रीब, मैं तुम्हारी औलाद पैदा करूँगा जो मेरी तस्बीह और हम्दो सना करेगी यानि मेरा ज़िक्र करेगी और तारीफ़ बयान करेगी और ऐसा घर बनाऊंगा जिसे मेरी याद में बनाया जायेगा और इसे बज़ुर्गी और बड़ाई के साथ ख़ास करके अपने नाम के साथ फ़ज़ीलत दूंगा और इसका नाम ख़ाना-ए-काबा रखूँगा” और कहा “जब तक तुम ज़िन्दा रहोगे इसे आबाद करोगे इसके बाद तुम्हारी औलाद में से बहुत से नबी, उम्मतें और क़ौमें होंगी जो हर ज़माने में इसे आबाद करेंगी।”

फिर आदम (अ.स.) को हुक्म दिया कि वह ख़ाना-ए-काबा जाएं और इसका तवाफ़ करें जैसे कि अर्श पर फ़रिश्तों को करते देखा है। उस वक़्त काबा एक याक़ूत या मोती की शक्ल में था। बाद में जब नूह (अ.स.) की क़ौम पर पानी के सैलाब का अज़ाब नाज़िल हुआ तो अल्लाह तआला ने इसे आसमान पर उठा लिया। उसके बाद अल्लाह तआला ने इब्राहीम (अ.स.) को ख़ाना-ए-काबा को दोबारा तामीर करनेका हुक्म दिया।

रिवायत है कि आदम (अ.स.) ख़ाना-ए-काबा पहुँच कर इसका तवाफ़ किया और हज के सब अरकान अदा किये। फिर “अराफ़ात” के मैदान में आदम (अ.स.) हव्वा (अ.स.) से मिले, दोनों एक दूसरे को पहचान गये और मुज़दलफा में एक दूसरे के क़रीब हुए। फिर दोनों “हिन्द” की तरफ़ रवाना हुए।

हज़रत आदम (अ.स.) की औलाद

हव्वा (अ.स.) ने 20 विलादत (Pregnancy) मैं 40 बंच्चो को पैदा किया। इस में से कुछ के नाम ये हैं
बेटों के नाम: क़ाबील, हाबील, शीश (अ.स.), अबाद, बालिग़, असानी, तूबा, बनान, शबूबा, हय्यान, ज़राबीस, हज़र, यहूद, सन्दल, बारुक़
बेटियों के नाम: क़लीहा अक़लीमा, लियूज़ा, अशूस, ख़रूरता

हर बार जुड़वा बच्चे पैदा होते थे अक लड़का और अक लड़की। जो बच्चे एक साथ पैदा होते थे उनकी शादी एक दूसरे से नही हो सकती थी जो अलग अलग पैदा होते थे उनकी शादी हो सकती थी।

आदम(अ.स.) ने अपनी औलाद को वो सब सिखाया जो अल्लाह तआला ने उन्हे सिखाया था। वो सब अक अल्लाह की इबादत करते थे और खेती करते और जानवरों को पालते थे।

हाबील और क़ाबील

आदम (अ.स.) के बेटों मैं से 2 बेटे थे क़ाबील और हाबील। क़ाबील के साथ जो बेटी पैदा हुई थी वो बहोत खूबसूरत थी लेकिन हाबील के साथ जो पैदा हुई थी वो उतनी खूबसूरत नही थी।
क़ाबील ने आदम (अ.स.) से कहा की वो अपनी जुड़वा बहन से शादी करेगा, आदम (अ.स.) ने माना कर दिया क्योंकि अल्लाह त’आला ने इसकी इजाज़त नही दी थी।
क़ाबील स्वभाव मैं बहोत सख़्त था और वो खेती करता था लेकिन हाबील बहोत नरम स्वभाव के थे वो बकरियाँ संभालते थे।

आदम (अ.स.) ने कहा के तुम दोनो अपनी क़ुर्बानी अल्लाह त’आला को पेश करो जिसकी क़ुर्बानी अल्लाह ता’अलह क़ुबूल कर लेगा वो सही होगा. उस ज़माने मैं जब अल्लाह के लिए क़ुर्बानी पेश की जाती तो एक आग आती जिसकी क़ुर्बानी वो आग खा लेती उसकी क़ुर्बानी क़ुबूल हो जाती थी।

हाबील ने सबसे अच्छा जानवर कुर्बान किया और क़ाबील ने सबसे रद्दी फसल का हिस्सा कुर्बान किया। हाबील की कुर्बानी क़ुबूल हुई और काबिल की कुर्बानी क़ुबूल नही हुई तो वो बोहोत गुस्सा हुआ।

एक दिन मौका देख कर उसने हाबील से कहा की मैं तुम्हे ख्तम कर दूँगा इस पर हाबील ने कहा मैं तुम पर हाथ नही उठाउँगा लेकिन काबिल ने हाबील के सर पर बड़ा सा पत्थर मारा और हाबील का कत्ल कर दिया। अब काबिल को समज नही आया की हाबील की लाश का क्या करे क्यों की इससे पहले कोई मारा नही था। तब अल्लाह ता’अलह ने 2 कौवे (Crows) को भेजा उन्होने लड़ाई की और एक ने दूसरे को मार डाला, फिर पहले ने गड्ढा खोदा और मारे हुए कौवे को दफ़ना दिया, ये देख कर काबिल ने भी हाबील को दफ़ना दिया।

फिर जिससे शादी करना चाहता था उसे लेकर आदम (अ.स.) से बहोत दूर चला गया। आदम (अ.स.) की क़ौम मै से जो जो शैतान के बहकावे मैं आते गये वो भी काबिल से मिलते गये।

हज़रत आदम (अ.स.) के वारिस

आदम (अ.स.) को जब हाबील के क़त्ल के बारे मैं पता चला तो उन्हे बहोत तकलीफ़ हुई फिर अल्लाह त’आला ने शीस (अ.स.) को उनके बाद नबी (पैगंबर) बनाया जो उनके ही बेटे थे, उनकी पैदाइश हाबील के क़त्ल के 50 साल बाद हुई। आदम (अ.स.) ने शीस (अ.स.) को सारा इल्म शीखाया अल्लाह ने 104 सहीफ़े(written laws Shariyah) उतरे उसमे से 50 शीस (अ.स.) को दिए।

हज़रत आदम (अ.स.) नबी व रसूल है

जिस नबी (पैगंबर) पर किताब नाज़िल की गई हो और नई शरीयत लेकर आये हों उन्हें रसूल कहते हैं। अल्लाह त’आला ने आदम (अ.स.) को उनकी औलाद की ही तरफ़ रसूल बना कर भेजा और उन पर सहीफ़े नाज़िल हुए।

हज़रत आदम (अ.स.) की वफ़ात

आदम (अ.स.) की रूह क़ब्ज़ होने के बाद फ़रिश्तों ने उन्हें बेरी के पत्तों और पानी के साथ ताक़ अदद के मुताबिक़ ग़ुस्ल दिया। कफ़न में भी ताक़ अदद का लिहाज़ रखा फिर लहद बनाकर सुपुर्दे खाक़ किया। और फ़रमाया कि इनकी औलाद में भी यही तरीक़ा जारी रहेगा।
फिर शीश (अ.स.) ने अपने वालिद आदम (अ.स.) के जनाज़े की नमाज़ पढ़ाई और दफ़नाया गया।

हज़रत हव्वा (अ.स.) की वफ़ात

हज़रत आदम (अ.स.) की वफात के एक साल बाद ही हव्वा (अ.स.) का भी इंतेक़ाल हो गया। उनकी की वफ़ात “बूज़” नामी पहाड़ी पर हुई।

अलहम्दु लिल्लाह हज़रत आदम (अ.स.) की पोस्ट कंप्लीट हुई। अल्लाह त’आला हमें सही लिखने की तौफ़ीक़ अता फरमाये और कोई ग़लती हो गई हो तो माफ़ फरमाये आमीन!

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References – संदर्भ
islamijankari.com/history/03-history-adam-2/
paigham786.blogspot.com/2015/11/complete-story-of-hazrat-adam.html

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